Avani Lekhara Biography in Hindi | अवनी लेखरा का जीवन परिचय

जीवन अच्छे कार्ड रखने में नहीं है, बल्कि उन कार्डों को खेलने मे है जिन्हें आप अच्छी तरह से पकड़ते है। ( अवनी लेखरा – टोक्यो पैरालम्पिक्स 2021, राइफल शूटर में, गोल्ड मैडलिस्ट )

अवनी लेखरा, पैरालम्पियन व राइफल शूटर, भारत की एक सर्वोत्कृष्ठ खिलाडी है जो कि, महज 19 साल की उम्र में, पैरालम्पिक्स में गोल्ड मैडल जीतने वाली भारत की पहली बेटी बन गई है। Avani Lekhara की ये उपलब्धि ना केवल इतिहास के पन्नों में, स्वर्णिम अक्षरों में, दर्ज की जायेगी बल्कि साथ ही साथ भारत में, बेटियों को लेकर व्याप्त नकारात्मक धारणा की समाप्ति में भी अह्म योगदान निभायेगी।

टोक्यो पैरालम्पिक्स 2020 में, Avani Lekhara ने, अपने अचूक निशाने का बेहतरीन नमूना प्रदर्शन करते है 10 मीटर एअर पिस्टल स्टैंडिंग में 7वां स्थान प्राप्त करते हुए स्वर्ण पदक / गोल्ड मैडल भारत के नाम किया और साथ ही साथ एक लम्बी अन्तराल के बाद आखिरकार Avani Lekhara ने, अपने पैरालम्पिक्स में, अपनी वापसी कर ही ली जो कि, ना केवल Avani Lekhara के लिए बल्कि पूरे भारतवर्ष के लिए बेहद महत्वपूर्ण व फलदायी सिद्ध होगा।

Avani Lekhara Biography in Hindi

अन्त, इस आर्टिकल में, आप सभी को विस्तार से Avani Lekhara Biography in Hindi की पूरी जानकारी प्रदान की जायेगी व पूरी कोशिश की जायेगी कि, अवनी लेखरा के जीवन के सभी पहलूओँ को आपके सामने बारीकी से प्रस्तुत किया जायें ताकि आप उनसे प्रेरणा व प्रोत्साहन प्राप्त कर सकें।

अवनी लेखरा का जीवन परिचय ।। Avani Lekhara Biography in Hindi

नामअवनी लेखरा ।। Avani Lekhara
निक नेमउपलब्ध नहीं है।
उम्र19 साल
जन्म स्थानजयपुर, राजस्थान, भारत
जन्म तिथि8 नवम्बर, 2001
गृहनगरशास्त्री नगर, जयपुर, राजस्थान, भारत
राष्ट्रीयताभारतीय
वजन55 किलोग्राम
कद5 फुट 2 इंच
आंखों का रंगकाला
बालों का रंगकाला
त्वचा का रंगसाफ
शिक्षालॉ, राजस्थान विश्वविघालय, भारत
राशितुला
धर्महिंदू
जातिउपलब्ध नहीं है
पेशापैरा राइफल शूटर
खेलराइफल शूटर
इवेंटवूमेंस 10 मीटर एअऱ राइफल स्टैडिंग कम्पीटिशन
मैरिटल स्टेट्सअविवाहित
कोचचन्द्र शेखर, सुभाष राणा, चन्दन सिंह, जे.पी नौटियाल व शूमा शिरुर आदि।
प्रेरणा स्रोतराइफल शूटर अभिनव बिंद्रा

टोक्यो पैरालम्पिक्स 2020 में, अवनी लेखरा के सर्वोत्कृष्ट प्रदर्शन की एक झलक

ताज़ा जानकारी के अनुसार, राजस्थान राज्य मे जन्मी भारत की बेटी अवनी लेखरा ने, टोक्यो पैरालम्पिक्स 2020 में, 30 अगस्त, 2021 को अपनी अचूक निशानेबाजी के बल पर 10 मीटर एअर पिस्टल स्टैडिंग में, भारत को गोल्ड मैडल दिलाया है जिसके तहत अवनी लेखरा को 10 मीटर एअर पिस्टल के क्वालिफिकेशन राउंड में, 7वें स्थान पर रहते हुए उन्होंने फाइनल्स में, अपनी जगह सुरक्षित की और 10 मीटर एअर पिस्टल के Class SH1 के फाइनल में कुल 249 प्वाइंट्स का स्कोर कर गोल्ड मैडल को सुरक्षित किया है और भारत को पैरालम्पिक्स में, गोल्ड मैडल दिलाने वाली पहली भारतीय महिला बनने का गौरव भी स्थापित किया है।

अवनी लेखरा का शुरुआती संघर्षपूर्ण जीवन कैसा रहा?

अवनी लेखरा, भारत की सर्वप्रसिद्ध निशानेबाज / राइफल शूटर है जिनका जन्म 8 नवम्बर, 2001 को राजस्थान के जयपुर में हुआ था जहां पर उनका शिक्षा-दीक्षा सम्पन्न हुई और उन्होंने अपने उज्जवल भविष्य की तरफ कदम बढ़ाया लेकिन साल 2012 में, एक दिन अवनी लेखरा अपने पिता श्री. प्रवीन लेखरा के साथ जयपुर से होते हुए धौलपुर की तरफ जा रहे थे.

लेकिन दुर्भाग्य से उनका सड़क हादसा हो गया जिसमें प्रवीन लेखरा और अवनी लेखरा दोनो को ही गंभीर चोटे आई लेकिन प्रवीन लेखना अर्थात् उनके पिता जी जल्द ही स्वस्थ हो गये लेकिन अवनी लेखरा को जीवन का सबसे बड़े कड़वे सच का सामना करना पड़ा अर्थात् उनकी रीढ़ की हड्डी में, गहरी चोट आई थी जिसकी वजह से उन्हें आजीवन व्हीलचेयर पर अपना जीवन बिताना पड़ेगा।

टूटी हुई अवनी को माता – पिता के स्नेह और अपनेपन से मिला सहारा?

जैसा कि, हमने आपको बताया कि, अवनी लेखरा जो कि, जीवन की सबसे कड़वी सच्चाई का सामना कर चुकी थी अब पूरी तरह से टूट गई थी और गहरी निराशा की शिकार हो गई थी जिसे देख उनके माता- पिता अन्दर ही अन्दर मरे जा रहे थे लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने हर निरन्तर प्रयास से अवनी को ऊर्जा, प्रेरणा व प्रोत्साहन प्रदान किया और अन्त में, टूटी हुई अवनी को माता – पिता के स्नेह और अपनेपन का सहारा मिला जिसकी वजह से वे दुबारा जीवन की तरफ आशा भरी नज़रों से देख पाई और उज्जवल भविष्य की तरफ कदम बढ़ा पाई।

अवनी लेखरा को राइफल शूटर बनने की प्रेरणा कैसे व किससे मिली?

अवनी के माता – पिता ने, अवनी के प्रति अपनी जिम्मेदारी और दायित्वों का बखूबी निर्वाह किया था जिसकी वजह से अवनी एक बार फिर से जीने लगी थी और पुरानी कड़वी यादों को भुलाकर नये भविष्य की तरफ ताकने लगी थी लेकिन क्या आप जानते है कि, अवनी लेखरा को राइफल शूटर बनने की प्रेरणा कैसे व किससे प्राप्त हुई?

अवनी के पिता जी, चाहते थे कि, अवनी किसी चीज़ में, अपना मन लगायें रखें ताकि उसे वो दुर्घटना और सदमा फिर से याद ना आ सकें और इसी के लिए उनके पिता जी उन्हें भारत के सुप्रसिद्ध राइफल शूटर अभिनव बिंद्रा की बायोग्राफी लाकर दी ताकि अवनी ना केवल उनके बायोग्राफी से प्रेरणा व प्रोत्साहन प्राप्त कर सकें बल्कि उसके भीतर एक राइफल शूटर का जन्म हो सकें और वे अपने इस लक्ष्य में, कामयाब रहें क्योंकि इस बायोग्राफी को पढ़ने के बाद अवनी लेखरा के भीतर एक नये अचूक राइफल शूटर का जन्म हुआ जिसे प्रेरणा व प्रोत्साहन अभिनव बिंद्रा से प्राप्त हुई जिसके बाद उन्होंने अपने करीबी ट्रैनिंग सेन्टर में, जाकर ट्रैनिंग लेनी शुरु की।

क्या आप जानते है कि, अवनी लेखरा के कोच कौन है?

अवनी लेखरा यदि आप टोक्यो पैरालम्पिक्स 2020 में, राइफल शूटिंग में, गोल्ड मैडल भारत के नाम कर पाई है तो इसका श्रेय जितना उनके कठोर परिश्रम को जाता है उतना ही उनके माता-पिता और कोच भी जाता है। चन्दन सिंह, अवनी लेखरा के कोच है जिन्होंने ना केवल अवनी लेखरा को अपनी कमजोरी पर विजय पाने मे मदद की बल्कि साथी ही साथ अपने सफल प्रशिक्षण की बदौलत अवनी लेखरा को टोक्यो पैरालम्पिक्स 2020 में, गोल्ड मैडल भारत के नाम करने में, अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अवनी लेखरा के सफल करियर के पहलू कौन – कौन से है?

अवनी लेखरा, राइफल शूटिंग में, वर्ल्ड नंबर 5 रैंक प्राप्त कर चुकी है, साल 2017 में, उन्होंने जूनियर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया, साल 2019 के क्रोऐशिया में, सिल्वर मैडल अपने नाम किया और उनकी सफल व सार्थक प्रतिभा को देखते हुए राजस्थान सरकार ने, अवनी लेखरा को पहले ही राज्य के वन विभाग में, सहायक वन रक्षक के पद पर नियुक्त करके उन्हें सरकारी नौकरी प्रदान की है और इन सभी बातों से हम, अंदाजा लगा सकते कि, अवनी लेखरा का करियर कितना सफल व सार्थक रहा है।

अवनी लेखरा ने, किन – किन पुरस्कारों व उपलब्धियों को अपने नाम किया है?

अवनी लेखरा द्धारा अपने नाम किये गये पुरस्कारों व उपलब्धियों की एक लम्बी श्रृंखला है जिसे हम, कुछ बिंदुओं की मदद से आपके सामने प्रस्तुत करना चाहते है जो कि, इस प्रकार से हैं-

  1. साल 2019 में, आयोजित पैरा शूटिंग विश्वकप में, अवनी में, रजत पदक अपने नाम किया,
  2. टोक्यो पैरालम्पिक्स 2020 में, हाल ही में, अवनी लेखरा में, अपने अचूक निशानेबाजी के बल पर गोल्ड मैडल अपने नाम किया है,
  3. साल 2015 में, आयोजित राष्ट्रीय पैरालम्पिक शूटिंग चैम्पियनशिप में अवनी में, कास्यं पदक अपने नाम किया है,
  4. अवनी लेखरा का एक रिकॉर्ड रहा है कि, उन्होंने लगातार 5 बार राष्ट्रीय प्रतियोगिताओँ में, 5 बार गोल्ड मैडल अपने नाम किया है,
  5. और साथ ही साथ अवनी लेखरा पैरालम्पिक्स में, गोल्ड मैडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गई है आदि।

उपरोक्त बिंदुओँ की मदद से हमने आपको विस्तार से बताया कि, अवनी लेखरा ने, किन – किन पुरस्कारों व उपलब्धियों को अपने नाम किया।

देश व राज्य का नाम रौशन करने के लिए राजस्थान सरकार ने अवनी को क्या पुरस्कार दिया है?

अवनी लेखरा ने, टोक्यो पैरालम्पिक्स 2020 में, गोल्ड मैडल जीतकर ना केवल भारत का नाम रौशन किया है बल्कि साथ ही साथ राजस्थान राज्य का नाम भी अमर कर दिया है जिसके फलस्वरुप राजस्थान सरकार ने, अवनी लेखरा को ’’ बेटी बचाओँ बेटी पढ़ाओं ’’ का ब्रांड अम्बेसडर बनाया है।

और वहीं दूसरी तरफ राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री. अशोक गहलोत में, टोक्यो पैरालम्पिक्स 2020 में, अवनी लेखरा को मिलाकर कुल 3 अन्य खिलाडिओं को जिन्होंने गोल्ड मैडल प्राप्त किया है उनके लिए नकद इनामा राशि की घोषणा कर दी है जिसके तहत अवनी लेखरा को गोल्ड मैडल जीतने के लिए 3 करोड़ रुपय, भाला फेंक रजत पदक जीतने पर 2 करोड़ रुपय और सुन्दर सिंह गुर्जर को कास्यं पदक जीतने के लिए कुल 1 करोड़ रुपयो की नकद इनामी राशि प्रदान की जायेगी।

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निष्कर्ष

हमने अपने इस आर्टिकल में ना केवल आपको विस्तार से टोक्यो पैरालम्पिक्स 2021 में, गोल्ड मैडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला अवनी लेखरा के जीवन परिचय के बारे में, बताया ताकि  आप उनसे प्रेरणा व प्रोत्साहन प्राप्त करके अपन निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति कर सकें और अपने उज्जवल भविष्य का निर्माण कर सकें।

अन्त, हमें पूरी आशा व उम्मीद है कि, आपको हमारा ये आर्टिकल जरुर पसंद आया होगा जिसके लिए ना केवल आप हमारे इस आर्टिकल को लाइक करेंगे, शेयर करेंगे बल्कि साथ ही साथ अपने विचार व सुझाव भी हमें, कमेंट करके बतायेंगे ताकि हम, इसी प्रकार के आर्टिकल आपके लिए प्रस्तुत कर सकें।

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